जसप्रीत बुमराह को मनोज तिवारी ने बोला – ‘क्रिकेट से बड़ा कोई नहीं!’
इंग्लैंड में हुई टेस्ट सीरीज़ का बवंडर
भारत बनाम इंग्लैंड की एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी समाप्त होने के बाद एक बहुत बड़ी बहस छिड़ गई है। दुनिया के नंबर वन टेस्ट गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने इस पांच मैचों की सीरीज़ में केवल तीन टेस्ट मैच खेले। हालांकि उन्होंने इन तीन मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्रह विकेट चटकाए और दो बार पांच विकेट की झोली भरी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जब भारतीय टीम को सबसे ज्यादा अपने स्टार गेंदबाज़ की जरूरत थी, तब बुमराह बाकी दो मैचों से गायब रहे। इस बीच मोहम्मद सिराज ने पूरी जिम्मेदारी संभाली, एक सौ पचासी ओवर से अधिक गेंदबाजी की और दोनों टीमों में सबसे ज्यादा तेईस विकेट हासिल करके अपना दमखम दिखाया।
मनोज तिवारी का धमाकेदार बयान
पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ मनोज तिवारी ने इस मामले पर बेबाकी से अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि “क्रिकेट के खेल से कोई भी व्यक्ति बड़ा नहीं है, चाहे वो जसप्रीत बुमराह हो, विराट कोहली हो या रोहित शर्मा हो।” तिवारी का मानना है कि अगर किसी खिलाड़ी की पहले से ही योजना है कि वह पूरी सीरीज़ नहीं खेलेगा, तो उसे टीम में ही नहीं लेना चाहिए।
तिवारी के अनुसार, “जब आपको पता है कि खिलाड़ी पांच टेस्ट मैच लगातार नहीं खेल सकता, तो फिर उस व्यक्ति को चुनना ही क्यों? यह रणनीति गलत है और टीम की एकजुटता के लिए नुकसानदायक है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब बेंच स्ट्रेंथ मजबूत है और युवा तेज गेंदबाज़ मैदान में उतरने को तैयार हैं, तो ऐसी परिस्थितियों में किसी एक खिलाड़ी के लिए अलग नियम बनाना उचित नहीं।
टीम मैनेजमेंट पर भी सवाल
मनोज तिवारी ने हेड कोच गौतम गंभीर और बाकी टीम मैनेजमेंट पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीरीज़ से पहले ही मीडिया में यह जानकारी दे देना कि बुमराह केवल तीन मैच खेलेंगे, एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल थी। तिवारी ने पूछा, “आप अपनी रणनीति विपक्षी टीम को क्यों बता रहे हैं? इससे इंग्लैंड को अपनी योजना बनाने में मदद मिल गई।”
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की पारदर्शिता से विपक्षी टीम का आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि इंग्लैंड अपनी गलतियों के कारण सीरीज़ हार गई, लेकिन पहले से जानकारी होने से उनकी तैयारी और बेहतर हो गई थी।
बुमराह की चुनौतियां और वर्कलोड मैनेजमेंट
यह जानना भी जरूरी है कि बुमराह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में सभी पांच टेस्ट मैच खेले थे। लेकिन सिडनी में निर्णायक मैच के दौरान उन्हें कमर में दर्द की समस्या हुई, जिसके कारण उन्हें आईसीसी मेंस चैंपियंस ट्रॉफी से बाहर होना पड़ा। इसी वजह से चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट ने फैसला किया कि बुमराह केवल तीन टेस्ट मैचों में हिस्सा लेंगे।
हालांकि, तिवारी का मानना है कि चाहे कारण कुछ भी हो, अगर खिलाड़ी सभी मैचों के लिए उपलब्ध नहीं है तो उसे मुख्य टीम में नहीं लेना चाहिए। वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है, लेकिन यह सभी खिलाड़ियों के लिए समान नियमों के साथ होना चाहिए।
क्रिकेट प्रेमियों में बंटे मत
सोशल मीडिया पर इस विषय पर तीखी बहस हो रही है। कुछ फैंस मनोज तिवारी की बात से सहमत हैं और कहते हैं कि स्टार खिलाड़ियों के लिए अलग नियम नहीं होने चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, कई लोगों का मानना है कि बुमराह जैसे कीमती खिलाड़ी का स्वास्थ्य सबसे पहले आता है और उनका वर्कलोड मैनेजमेंट जरूरी है।
एशिया कप 2025 आने वाला है और सभी की नजरें इस बात पर हैं कि टीम इंडिया इस विवाद से कैसे निपटती है। क्या बुमराह पूरी सीरीज़ खेलेंगे या फिर वही पुराना चयन नीति अपनाई जाएगी?
भारतीय क्रिकेट का भविष्य
मनोज तिवारी के इस बयान ने एक बहुत पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ी प्रबंधन, फिटनेस मानदंड, और “कोई भी खेल से बड़ा नहीं” का सिद्धांत आज के समय में कितना प्रासंगिक है – यह सवाल अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड और टीम मैनेजमेंट इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है। क्या वे पारदर्शिता और निष्पक्षता की नीति अपनाएंगे, या फिर स्टार खिलाड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था जारी रहेगी – यही सवाल अब हर क्रिकेट प्रेमी के मन में है।
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