“विकेट लेने के बाद भी माही भाई गालियां दे रहे थे…” – जब ‘कैप्टन कूल’ MS Dhoni ने खोया आपा
महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट जगत में ‘कैप्टन कूल’ के नाम से जाना जाता है। मैदान पर चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थिति क्यों न हो, धोनी का शांत स्वभाव हमेशा चर्चा का विषय रहा है। लेकिन हर इंसान की तरह, उनके भी कुछ ऐसे पल रहे हैं जब उन्होंने अपना आपा खोया। उनके पूर्व टीममेट और तेज गेंदबाज मोहित शर्मा (Mohit Sharma) ने हाल ही में एक ऐसा ही पुराना और मजेदार किस्सा सुनाया है, जब धोनी उन पर बुरी तरह भड़क गए थे।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना साल 2014 में खेली गई चैंपियंस लीग ट्वेंटी-20 (CLT20) की है। चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) का मुकाबला कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) से हो रहा था। मोहित शर्मा ने क्रिकट्रैकर को दिए एक इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए बताया:
“माही भाई का औरा बहुत कूल और शांत है। आप उनसे गुस्सा होने की उम्मीद नहीं करते। वो किस्सा CLT20 का था, KKR के खिलाफ। माही भाई ने गेंदबाजी के लिए ईश्वर पांडे (Ishwar Pandey) को बुलाया, लेकिन मुझे लगा कि उन्होंने मुझे बुलाया है। मैं अपना रन-अप शुरू कर चुका था, तभी माही भाई ने कहा कि उन्होंने मुझे नहीं, ईश्वर को बुलाया है।”
मोहित ने आगे बताया, “अंपायर ने कहा कि चूंकि मैं अपना रन-अप शुरू कर चुका हूं, इसलिए मुझे ही गेंद फेंकनी होगी। यह सुनकर माही भाई मुझ पर बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने मुझे कुछ गालियां दीं।”
गुस्से के बीच आया मजेदार ट्विस्ट
कहानी का सबसे मजेदार हिस्सा इसके बाद आया। मोहित शर्मा (Mohit Sharma) ने बताया कि धोनी के गुस्से के बावजूद, उन्होंने उस ओवर की पहली ही गेंद पर खतरनाक बल्लेबाज यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) का विकेट ले लिया।
मोहित ने हंसते हुए कहा, “मैंने पहली ही गेंद पर यूसुफ भाई का विकेट ले लिया। जब टीम जश्न मना रही थी, उस दौरान भी माही भाई मुझे गालियां दे रहे थे।” उन्होंने कहा कि एक युवा खिलाड़ी के तौर पर जब आप पर धोनी जैसा दिग्गज गुस्सा करता है, तो आप उत्साहित हो जाते हैं। मोहित ने यह भी माना कि धोनी की कप्तानी में खेलकर उन्होंने खेल के बारे में बहुत कुछ सीखा।
अपने करियर पर क्या सोचते हैं मोहित शर्मा?
मोहित शर्मा, जिन्होंने भारत के लिए 26 वनडे और 8 T20I खेले हैं, अब लंबी प्लानिंग में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में कहा था, “मैं अगले एक या दो साल के बारे में नहीं सोच रहा हूं। मैं एक ऐसा इंसान नहीं हूं जो लंबी अवधि की योजना बनाता है, क्योंकि मैंने सीखा है कि कभी-कभी चीजें वैसी नहीं होतीं जैसी आप चाहते हैं। मैं बस अगले मैच के बारे में सोचता हूं।” यह दर्शाता है कि अनुभव ने उन्हें अपने करियर को लेकर कितना प्रैक्टिकल बना दिया है।
धोनी के गुस्से का यह किस्सा दिखाता है कि मैदान पर जीत के लिए वह कितने जुनूनी थे और अपने खिलाड़ियों से हमेशा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद करते थे, भले ही इसके लिए उन्हें कभी-कभी ‘कैप्टन कूल’ की छवि से बाहर ही क्यों न आना पड़े।
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