हाल ही में साउथ में एक्टर्स सिर्फ एक फिल्म बनाने के लिए समय लेते है 1- 2साल लगाते हैं और वही दुसरी तरफ बॉलीवुड में सिर्फ 40 दिन में काम हो जाता है।

बॉलीवुड में एक्टर्स हमारी फिल्म मत देखो कहते फिरते हैं वही साउथ में एक्टर्स लोगो को भगवान मानते है आप किसको चुनना पसंद करोगे।

साउथ सिनेमा फिलहाल हर फिल्म में कुछ नई कोशिश कर रहा है,  और वही दुसरी तरफ बॉलीवुड में फिल्म डुबे तो डुबे हम नहीं बदलेंगे।

साउथ में एक फिल्म में 2-3 बड़े एक्टर्स एक साथ आ जाते हैं और वही बॉलीवुड में स्क्रीन पर कोन ज्यादा दिखा उसे लेकर लड़ाई हो जाती है।

सिर्फ 10-15 करोड़ की बजट में फिल्म बनाना आसानी से मुनाफा कमाना साउथ की फिलोसपी है, लेकिन बॉलीवुड में अभिनेताओं की फीस 80 करोड़ और फिल्म की कमाई 40 करोड़।

साउथ में निर्देशक को फिल्म का पुरा पावर देना ना की बड़े स्टार्स का खुद फिल्म का डायरेक्ट करना।

नेपोटिज्म तो बॉलीवुड या साउथ दोनों में है लकिन मेंहनत सिर्फ साउथ में दिखती है बॉलीवुड में सिर्फ साउथ की फिल्मों के रीमिक्स का दौर चल रहा है।

असली लेखक ही फिल्म की कहानी लिखते हैं और उन्हे मौका मिलता है, पर यहा तो हीरो के अनुसार डायलॉग या सीन दोनो बदल जाते हैं।

भारतीय संस्कृति को ज्यादा से ज्यादा अपने सिनेमा में शामिल करना साउथ वाले ये कर रहे है , वही बॉलीवुड में  संस्कृति को विलन दिखाया जा रहा है।

बड़े स्टार्स रीमेक पर रिटर्न कर रहे हैं आमिर खान, रितिक रोशन सब के सब, साउथ में भी रीमेक बनते हैं लेकिन उसमे एक्टर वो है जो किसी इंडस्ट्री का चेहरा नहीं है।